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शरीर के हर दरà¥à¤¦ के इलाज के बारे में जानिठसबकà¥à¤›
हम अकà¥â€à¤¸à¤° शरीर में होने वाले छोटे-मोटे दरà¥à¤¦ को नजरअंदाज कर देते हैं या फिर पेन किलर खा लेते हैं। अगर आप à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ करते हैं तो à¤à¤¸à¤¾ न करें, डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° के परामरà¥à¤¶ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही दवा लें। ताकि à¤à¤µà¤¿à¤·à¥â€à¤¯ में होने वाली परेशानी से बच सकें।
 ऊह आह आउच... बोलने वाले लगातार बढ़ रहे हैं। कोई गरà¥à¤¦à¤¨ दरà¥à¤¦ से परेशान है तो कोई कमर दरà¥à¤¦ से तो कोई घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ से। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ से पूछकर अलग-अलग तरह के दरà¥à¤¦ के कारण, बचाव और उनके इलाज के बारे में पूरी जानकारी दे रही हैं पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤‚का सिंह और पूजा मेहरोतà¥à¤°à¤¾
दरà¥à¤¦ कितनी तरह का
दरà¥à¤¦ चार तरह का होता हैः फिजियोलॉजिकल (चोट लगने या किसी बाहरी दिकà¥à¤•त की वजह से), नà¥à¤¯à¥‚रोपैथिक (नसों में दरà¥à¤¦), इनफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ (सूजन वाला जैसे कि कमर दरà¥à¤¦, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ का दरà¥à¤¦ आदि) और डिसफंकà¥à¤¶à¤¨à¤² पेन (जिसकी वजह समठनहीं आती लेकिन दरà¥à¤¦ बना रहता है)। डिसफंकà¥à¤¶à¤¨à¤² पेन शरीर के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ में अचानक उठता है और बहà¥à¤¤ तेज होता है। मरीज दरà¥à¤¦ की शिकायत करता है लेकिन डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दरà¥à¤¦ की वजह का पता नहीं लग पाता। जहां तक मौसम की बात है तो सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जोड़ों का दरà¥à¤¦ परेशान करता है।
जोड़ों के दरà¥à¤¦ की वजह
- चोट लगना
- à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ न करना
- वजन बढ़ जाना
- विटामिन डी और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी हो जाना
- सेडंटरी लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² यानी दिन à¤à¤° जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° वकà¥à¤¤ à¤à¤• ही जगह बैठे रहना
- घंटों कंपà¥à¤¯à¥‚टर पर काम करना
- गलत पॉशà¥à¤šà¤° यानी à¤à¥à¤•कर बैठना, गलत तरीके से लेटना या चलना
- घंटों डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µ करना
- बेहद कम तापमान में लंबे समय तक रहना
- जंक फूड और कोलà¥à¤¡ डà¥à¤°à¤¿à¤‚क का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन
- बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तनाव लेना, हमेशा हड़बड़ी में रहना
- गरà¥à¤¦à¤¨ और कान के बीच फोन लगाकर लंबी बात करना
- मोटा या सखà¥à¤¤ तकिया इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना
- बेहद नरà¥à¤® गदà¥à¤¦à¥‡ पर सोना
समà¤à¥‡à¤‚ दरà¥à¤¦ के साइकल को
शà¥à¤°à¥‚ में दरà¥à¤¦ हलà¥à¤•ा होता है और हम उसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन à¤à¤¸à¤¾ करने से आगे जाकर दरà¥à¤¦ कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• हो जाता है और धीरे-धीरे उसे सहने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ कम हो जाती है। दरà¥à¤¦ आमतौर पर जोड़ों से शà¥à¤°à¥‚ होता है यानी शरीर का जो à¤à¥€ अंग आसानी से मà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¤¾ है या जिसमें अकड़न होती है जैसे कि कोहनी, कलाई, घà¥à¤Ÿà¤¨à¤¾, गरà¥à¤¦à¤¨, कमर, उंगलियां, टखने आदि में दरà¥à¤¦ जलà¥à¤¦à¥€ होता है।
सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल यानी गरà¥à¤¦à¤¨ का दरà¥à¤¦
यà¥à¤µà¤¾à¤“ं में दरà¥à¤¦ का बड़ा कारण सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¸ है। इसमें दरà¥à¤¦ सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤¦à¤¨ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है और समय पर इलाज न कराने पर यह दरà¥à¤¦ बढ़ता हà¥à¤† हाथ और कमर तक पहà¥à¤‚च जाता है। इससे रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ में धीरे-धीरे सूजन आ जाती है या वह अकड़ जाती है। इसे इनकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤‚ग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¸ कहते हैं। कà¥à¤› यà¥à¤µà¤¾à¤“ं की गरà¥à¤¦à¤¨ पीछे थोड़ी उठी-सी दिखती है। वे डिसà¥à¤• बलà¥à¤œ से पीड़ित होते हैं। इनमें गलत पॉशà¥à¤šà¤° या लगातार बैठने से हडà¥à¤¡à¥€ शेप बदलकर नया आकार लेती है। à¤à¤¸à¥‡ लोगों को गरà¥à¤¦à¤¨ में समय-समय पर तेज दरà¥à¤¦ होता है। अगर आप इससे पीड़ित हैं तो गरà¥à¤¦à¤¨ को आगे की ओर à¤à¥à¤•ाने से बचें।
कमर का दरà¥à¤¦
कमर में दरà¥à¤¦ दो तरह का होता है - पहला : अचानक हà¥à¤† तेज दरà¥à¤¦ (à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट पेन) और दूसरा : लंबे वकà¥à¤¤ से हो रहा दरà¥à¤¦ (कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• पेन)। à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट पेन अकà¥à¤¸à¤° जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वजन उठाने या किसी नस के खिंचने से होता है। इसमें कमर में à¤à¤• चà¥à¤à¤¨-सी महसूस होती है। कई बार यह आराम करने, सिकाई करने और बाम आदि लगाने से दो-चार दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• पेन लंबे समय तक रहता है और उसका पूरा और सही इलाज जरूरी है। कमर दरà¥à¤¦ के साथ साइटिका का दरà¥à¤¦ à¤à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ है। साइटिका सबसे बड़ी नरà¥à¤µ है जोकि कमर से लेकर पंजे तक जाती है। अगर यह कहीं दब जाती है तो तेज दरà¥à¤¦ शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। हां, दरà¥à¤¦ होने के फौरन बाद कà¥à¤› सावधानियां बरतनी जरूरी हैं, मसलन वजन न उठाà¤à¤‚, आगे की ओर न à¤à¥à¤•ें। à¤à¥à¤•ना ही हो तो घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के बल बैठें। फिर सामान उठाà¤à¤‚। बिसà¥à¤¤à¤° से उठते हà¥à¤ पहले करवट लें और फिर उठें।
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ का दरà¥à¤¦
पहले घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ की शिकायत 50 पार के लोग करते थे लेकिन अब 30-35 साल की उमà¥à¤° में ही लोगों के घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ जवाब देने लगे हैं। वजन बढ़ने के अलावा ऑटोइमà¥à¤¯à¥‚न बीमारी à¤à¥€ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ की वजह बनती हैं। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में दरà¥à¤¦ हो जाठतो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की बताई à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ जरूर करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि घà¥à¤Ÿà¤¨à¤¾ कमजोर होने से पैरों की मसलà¥à¤¸ à¤à¥€ कमजोर होने लग जाती हैं। धीरे-धीरे दरà¥à¤¦ कमर तक और फिर सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨ तक à¤à¥€ पहà¥à¤‚च सकता है। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में घिसावट है तो कà¥à¤› महीने गà¥à¤²à¥‚कोसामाइन (Glucosamine) और कोंडà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤¨ सलà¥à¤«à¥‡à¤Ÿ (Chondroitin Sulphate) के कैपà¥à¤¸à¥‚ल ले सकते हैं। यह डाइट सपà¥à¤²à¤¿à¤®à¥‡à¤‚ट है। कब और कितना लेना है, इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लें। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ का दरà¥à¤¦ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने पर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में चिकनाई बढ़ाने के लिठइंजेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ दिठजाते हैं। इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दो तरह के होते हैं: à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ वाले और दूसरे पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ (विसà¥à¤•स) वाले। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ वाले इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ होते हैं इसलिठइनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लेने से बचना चाहिà¤à¥¤ विसà¥à¤•स वाला à¤à¤• इंजेकà¥à¤¶à¤¨ करीब 10-15 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का होता है, जिसका असर कà¥à¤› महीने से लेकर कà¥à¤› साल तक रह सकता है। इससे à¤à¥€ फायदा न होने पर नी-रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जाती है।
दरà¥à¤¦ के फौरन बाद कà¥à¤¯à¤¾ करें
दरà¥à¤¦ होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° RICE का फॉरà¥à¤®à¥à¤¯à¥à¤²à¤¾ अपनाने की सलाह देते हैं। राइस यानी रेसà¥à¤Ÿ, आइस, कंपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¨ और à¤à¤²à¤¿à¤µà¥‡à¤¶à¤¨à¥¤
रेसà¥à¤Ÿà¤ƒ कोई à¤à¥€ दरà¥à¤¦ हो, आराम करें। घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के दरà¥à¤¦ में घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ को मोड़े नहीं। कमर दरà¥à¤¦ में आगे को न à¤à¥à¤•ें।
आइसः जहां दरà¥à¤¦ है, वहां बरà¥à¤« से सिकाई करें।
कंपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¨à¤ƒ दरà¥à¤¦ वाली जगह को बैंडेज से बांध लें। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡, कोहनी आदि में दरà¥à¤¦ के लिठयह इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि बैंडेज न बहà¥à¤¤ टाइट हो और न ही ढीला।
à¤à¤²à¤¿à¤µà¥‡à¤¶à¤¨à¤ƒ पैर दरà¥à¤¦ में à¤à¤²à¤¿à¤µà¥‡à¤¶à¤¨ बहà¥à¤¤ कारगर इलाज है। लेटते वकà¥à¤¤ पैर के नीचे तकिया रखें जिससे पैर और घà¥à¤Ÿà¤¨à¤¾ थोड़ा ऊंचा रहे।
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